बना लो क़रीब कोई ठिकाना मिलना आसान हो जाए

दफ़न हु उस के घर के पास कब्रिस्तान में, मगर फिर भी वो रोती है, 
खुद ही तो कहा करती थी , बना लो क़रीब कोई ठिकाना मिलना आसान हो जाए.

मरता हे कोई हम पर भी



जिस दिन सपनो में उनका दीदार हो जाता है,
उस रात सोना दुस्वार हो जाता है,
मरता हे कोई हम पर भी,
ये सोच कर अपने आप से प्यार हो जाता है