खुदा ने जब इश्क़ बनाया होगा



खुदा ने जब इश्क़ बनाया होगा
तो खुद भी ज़रूर आजमाया होगा
हमारी तो औकात ही क्या है
इस इश्क़ ने खुदा को भी ज़रूर रुलाया होगा

झूठी मुस्कान लिए दर्द छुपाते रहे



ना ज़िन्द्दगी मिली न वफ़ा मिली,
क्यों हर ख़ुशी हमसे खफा मिली,
झूठी मुस्कान लिए दर्द छुपाते रहे,
सच प्यार करने की क्या खूब सजा मिली

मिटा देते सनम तेरे दर्द को सीने से



हर जख्म किसी ठोकर की मेहरबानी है,
मेरी ज़िंदगी एक कहानी है,
मिटा देते सनम तेरे दर्द को सीने से,
पर ये दर्द ही तो तेरी आखरी निशानी है.

हर याद पर दिल का दर्द ताज़ा हुआ



हर मुलाक़ात पर वक़्त का तकाज़ा हुआ,
हर याद पर दिल का दर्द ताज़ा हुआ,
सुनी थी सिर्फ ग़ज़लों में जुदाई की बातें,
जब खुद पर बीती तो हक़ीक़त का अंदाज़ा हुआ..

टूटे हुए दिल का मुरब्बा बना गई



टूटे हुए दिल का मुरब्बा बना गई
घर को मेरे कचरे का डब्बा बना गई,
निकाह के 3 महीने भी ना गुजरे थे,
ना जाने किस हिसाब से वो मुझे अब्बा बना गई

क्यों प्यार करके भूल जाते है लोग



क्यों प्यार करके भूल जाते है लोग,
बिच मेहफिल में अक्सर छोड़ जाते है लोग.
न निभाना था साथ जब उम्र भर का.
क्यों दगा देके दुसरो को बेवफा कह जाते है लोग.

कभी थी मिलने की तमन्ना आपसे



आज न जाने क्यों आँखों में आँसू आ गया?
लिखते लिखते वो ख़्वाब याद आ गया?
कभी थी मिलने की तमन्ना आपसे...
न जाने क्यू ,आंसुओ में आपकी तस्वीर बन गयी.

हम तो मोहताज है आपकी एक दीदार के लिए



सौ बेवफ़ाई कबूल है एक वफ़ा के लिए,
सौ ऑंसू कबूल है एक हंसी के लिए,
हम तो मोहताज है आपकी एक दीदार के लिए,
सौ दुशमन कबूल है आपके प्यार के लिए !!

हम तोह दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं



गुनाह करके सजा से डरते है
ज़हर पी के दवा से डरते है
दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं
हम तोह दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं,

एक दोस्त न मिला गम भुलाने के लिए


काफी है सपने दिल को बहलाने के लिए,
मोहब्बत करलो दिल को दुखाने के लिए,
चाहे भले रखना पड़े गम से वास्ता
एक दोस्त न मिला गम भुलाने के लिए !

माँगा था प्यार में ज़िंदगी तुम से

 
एक एक कदम पे इतने इम्तिहान किस लिए
इतने सारे दर्द, और एक इंसान,किस लिए.
सब के अंदर अच्छा बुरा दोनों मौजूद हैं
अक्सर जीत जाता है शैतान किस लिए
मेरा नहीं है सब कुछ, है तेरा दिया हुआ
हो जाता है फिर किसी को गुमान किस लिए
माँगा था प्यार में ज़िंदगी तुम से,
पर दिया तूने प्यार में मौत किस लिए

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम से रोना आया.



ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम से रोना आया.
ना जाने क्यों आज तेरे नाम से रोना आया,
यु तो हर शाम उम्मीद में गुज़र जाती हैं.
आज कुछ बातें याद आयी तो शाम पे रोना आया.
कभी तक़दीर, कभी मातम,कभी दुनिया का गिला,
मंज़िल-इ-इश्क़ के हर काम पे रोना आया
जब हुआ ज़माने में मोहब्बत का ज़िक्र.
मुझे अपने दिल-इ-नाकाम पे रोना आया

किसी को मेरी मौत से खुशी मिल जाए...तो क्या बात हो




किताबो के पन्नों को पलट के सोचता हूँ,
यूँ पलट जाए मेरी ज़िंदगी तो क्या बात हो
ख्वाबो में जो रोज़-रोज़ मिलती है
हकीकत में मिल जाए, तो क्या बात हो
मतलब के लिए तो सब ढूँढ़ते हैं मुझको
बिन मतलब के जो पास आये कोई...तो क्या बात हो
कत्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा
कोई बातों से ले जाए तो क्या बात हो
जिंदा रहने तक ख़ुशी दूँगा सबको
किसी को मेरी मौत से खुशी मिल जाए...तो क्या बात हो !

आपको चाहने वाला सारा जहाँ निकला


मैंने सोचा आपको चाहने वाला सिर्फ मैं हूं,
आपको चाहने वाला सारा जहाँ निकला,
सोचा खुदा से इसकी शिकायत करूँ,
पर वो भी आपको चाहने वाला निकला !

आग उगलते हैं तेरे शहर के लोग


कैसे आऊं तेरे शहर की ओर,
आग उगलते हैं तेरे शहर के लोग,
मैं तो टूटा एक साक का पत्ता हूँ,
फूल तक कुचलते हैं तेरे घर के लोग.

हमरा चेहरा याद आयेगा

अंदाज़ निगाहों के जुबां पे आयेगा,
उस दिन तुम्हे चेहरा हमरा याद आयेगा
पछताओगे तुम उस दिन, जिस दिन
ये हमसफ़र जहाँ से चला जायेगा!!