हसरत है आपको पाने की , और कोई ख्वाहिस नहीं इस दीवाने की सिकवा तुम से नहीं खुद से है, क्या जरुरत थी आपको इतना खूबसूरत बनाने की. , और कोई ख्वाहिस नहीं इस दीवाने की सिकवा तुम से नहीं खुद से है, क्या जरुरत थी आपको इतना खूबसूरत बनाने की.
फिर से ये मायूस अंधेरा छटने लगा तो अच्छा लगा, ध्यान उनकी यादों से हटकर बटने लगा तो अच्छा लगा, यु तो तैरने को बहुत हाथ पाँव मरे हमने,,,,,, जब समंदर का पानी खुद ब खुद हटने लगा तो अच्छा लगा... जो शख्स कहकर गए थे कि नफरत ह मुझसे आज वही मेरा नाम रटने लगे तो अच्छा लगा, दिल से कोसिस की उसका नाम मिटाने की, ये नाम खुद ही मिटने लगा तो अच्छा लगा, मोहब्बत का तूफान मुझे उडाता रहा यहाँ वहाँ, ये तूफान मेरी बाँहों में सिमटने लगा तो अच्छा लगा जिसकी वजह से आज मैं जलने को तैयार हूँ, मेरी अर्थी से वो रोकर लिपटने लगी तो अच्छा लगा, कोसिस नाकाम रही मैं फिर से जी सकू, उसके छूने से साँस अटकने लगी तो अच्छा लगा.