मरता हे कोई हम पर भी



जिस दिन सपनो में उनका दीदार हो जाता है,
उस रात सोना दुस्वार हो जाता है,
मरता हे कोई हम पर भी,
ये सोच कर अपने आप से प्यार हो जाता है

मेरी जान के गोरे हाथों पे मेहँदी को लगाया होगा


आज दुल्हन के लाल जोड़े में उसे उसके सखियों ने सजाया होगा,
मेरी जान के गोरे हाथों पे मेहँदी को लगाया होगा,
बहोत गहरा चढ़ा होगा मेहँदी का रंग,
उस मेहँदी में उसने मेरे नाम छुपाया होगा.
रह-रह के रो पड़ी होगी,
जब उनको मेरा ख़याल आया होगा,
खुद को देखा होगा जब आईने में तो,
अक्स मेरा भी नज़र आया होगा,
बहुत प्यारी लग रही होगी वो,
आज देख कर उसको चाँद भी शरमाया होगा.
आज मेरी जान ने अपने माँ बाप की इज़्ज़त को बचाया होगा,
उसने बेटी होने का हर फ़र्ज़ निभाया होगा
मजबूर होगी आज वो सबसे ज़्यादा,
सोचता हूँ किस तरह उसने खुद को समझाया होगा,
अपने हाथों से हमारे खतों को जलाया होगा,
खुद को मजबूत बना कर मेरी यादों को मिटाया होगा,
भूखी होगी वो जानता हूँ मैं,
मेरे बिना उसने कुछ न खाया होगा,
कैसे संभाला होगा खुद को,
जब उसने फेरों में खुद को जलाया होगा
आज दुल्हन के लजाल जोड़े में उसे उसकी सखियों ने सजाया होगा...

मरने पे मजबूर कर देती है


ये इसक ही येशी चीज ही जो गम भर देती है,
जीने तो देती नहीं मरने पे मजबूर कर देती है.

हसरत है आपको पाने की


हसरत है आपको पाने की , और कोई ख्वाहिस नहीं इस दीवाने की सिकवा तुम से नहीं खुद से है, क्या जरुरत थी आपको इतना खूबसूरत बनाने की. , और कोई ख्वाहिस नहीं इस दीवाने की सिकवा तुम से नहीं खुद से है, क्या जरुरत थी आपको इतना खूबसूरत बनाने की.

न जाने कब होगा उस चाँद का दीदार


जब से समझा क्या हैं ये प्यार, करने लगे तबसे किसी का इंतज़ार. मांगने लगे उन्हें दुआओं में रब से, न जाने कब होगा उस चाँद का दीदार.

कमी महसूस होती है दूर जाने के बाद.


कोई निकलता है कोई दिल में बस जाने के बाद,
दर्द कितना होता है बिछड़ जाने के बाद.
जो पास होता है उसकी कद्र नही होती,
कमी महसूस होती है दूर जाने के बाद.

दिल से कोसिस की उसका नाम मिटाने की



फिर से ये मायूस अंधेरा छटने लगा तो अच्छा लगा,
ध्यान उनकी यादों से हटकर बटने लगा तो अच्छा लगा,
यु तो तैरने को बहुत हाथ पाँव मरे हमने,,,,,,
जब समंदर का पानी खुद ब खुद हटने लगा तो अच्छा लगा...
जो शख्स कहकर गए थे कि नफरत ह मुझसे
आज वही मेरा नाम रटने लगे तो अच्छा लगा,
दिल से कोसिस की उसका नाम मिटाने की,
ये नाम खुद ही मिटने लगा तो अच्छा लगा,
मोहब्बत का तूफान मुझे उडाता रहा यहाँ वहाँ,
ये तूफान मेरी बाँहों में सिमटने लगा तो अच्छा लगा
जिसकी वजह से आज मैं जलने को तैयार हूँ,
मेरी अर्थी से वो रोकर लिपटने लगी तो अच्छा लगा,
कोसिस नाकाम रही मैं फिर से जी सकू,
उसके छूने से साँस अटकने लगी तो अच्छा लगा.