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आँखें भी मेरी पलकों से सवाल करती हैं
आँखें भी मेरी पलकों से सवाल करती हैं,
हर वक़्त आपको ही बस याद करती हैं,
जब तक ना कर लें दीदार आपका,
तब तक वो आपका इंतज़ार करती हैं।
किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों होती है
किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों होती है,
जो नहीं मिलता उसी से मोहब्बत क्यों होती है,
कितने खाएं हैं धोखे इस मोहब्बत की राहों में,
फिर भी आँखें उसी के इंतज़ार में क्यों रोती हैं।
दीवानगी इससे बढ़कर और क्या होगी
बड़ा अरमान था तेरे साथ जीवन बिताने का,
शिकवा है बस तेरे खामोश रह जाने का,
दीवानगी इससे बढ़कर और क्या होगी,
आज भी इंतज़ार है बस तेरे आने का।
हम भी ज़िंदगी से मुँह मोड़ लेते
किस्मत ने तुमसे दूर कर दिया,
अकेलेपन ने दिल को मज़बूर कर दिया,
हम भी ज़िंदगी से मुँह मोड़ लेते मगर,
तुम्हारे इंतज़ार ने जीने पर मज़बूर कर दिया।
जिन्हें मिली बे-वफ़ाई महोब्बत में
इंसान के कंधों पर ईंसान जा रहा था,
कफ़न में लिपटा अरमान जा रहा था,
जिन्हें मिली बे-वफ़ाई महोब्बत में,
वफ़ा की तलाश में श्मशान जा रहा था।
दुख न सही गम इस बात का है
वो तो दिवानी थी मुझे तन्हां छोड़ गई,
खुद न रुकी तो अपना साया छोड़ गई,
दुख न सही गम इस बात का है,
आंखो से करके वादा होंठो से तोड़ गई।
वफ़ा के नाम से वोह अनजान थे
वफ़ा के नाम से वोह अनजान थे,
किसी की बेवफाई से शायद परेशान थे,
हमने वफ़ा देनी चाही तो पता चला!
हम खुद बेवफा के नाम से बदनाम थे!
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