आज कुछ कमी सी है तेरे बगैर

आज कुछ कमी सी है तेरे बगैर,
ना रंग ना रौशनी है तेरे बगैर,
वक़्त अपनी रफ़्तार से चल रहा है,
बस धड़कन थम सी गयी है तेरे बगैर।

वो तो साँसों में बसी है मेरे

हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर,
हम उसे अपनी खता कहते हैं,
वो तो साँसों में बसी है मेरे,
जाने क्यों लोग उसे मुझे जुदा कहते हैं।

कैसे भरेगी वो जगह जहाँ तेरी कमी होगी

ज़ुबान खामोश आँखों में नमी होगी,
ये बस एक दास्तां-ए ज़िंदगी होगी,
भरने को तो हर ज़ख्म भर जाएगा,
कैसे भरेगी वो जगह जहाँ तेरी कमी होगी।

तेरी सादगी में इतना फरेब था

कैसी अजीब तुझसे यह जुदाई थी,
कि तुझे अलविदा भी ना कह सका,
तेरी सादगी में इतना फरेब था,
कि तुझे बेवफा भी ना कहा सका।

गलतियों से जुदा तु भी नहीं, मैं भी नहीं

गलतियों से जुदा तु भी नहीं, मैं भी नहीं,
दोनों इंसान हैं, ख़ुदा तु भी नहीं, मैं भी नहीं,
गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियां,
वरना फितरत का बुरा तु भी नहीं था, मैं भी नहीं।

आँखें भी मेरी पलकों से सवाल करती हैं

आँखें भी मेरी पलकों से सवाल करती हैं,
हर वक़्त आपको ही तो याद करती हैं,
जब तक देख न लें चेहरा आपका,
तब तक हर घडी आपका इंतज़ार करती हैं।

उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद

उस अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है,
इंकार करने पर भी चाहत का इकरार क्यों है,
उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद,
फिर हर मोड़ पे उसी का इंतज़ार क्यों है।