सुर्ख आँखों से जब वो देखते हैं,
हम घबराकर आँखें झुका लेते हैं,
क्यों मिलायें उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से ही अपना बना लेते हैं।
हम घबराकर आँखें झुका लेते हैं,
क्यों मिलायें उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से ही अपना बना लेते हैं।
| हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर, हम उसे अपनी खता कहते हैं, वो तो साँसों में बसी है मेरे; जाने क्यों लोग उसे मुझे जुदा कहते हैं। |