| ना जाने कौन सा जादू है तेरी बाहों में, शराब सा नशा है तेरी निगाहों में, तेरी तलाश में तेरे मिलने की आस लिए, दुआऐं मॉगता फिरता हूँ मैं दरगाहों में। |
शराब सा नशा है तेरी निगाहों में
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं
नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं,
हम घबरा कर आँखें झुका लेते हैं,
कौन मिलाये उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।
हम घबरा कर आँखें झुका लेते हैं,
कौन मिलाये उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।
क्यों मिलायें उन आँखों से आँखें
सुर्ख आँखों से जब वो देखते हैं,
हम घबराकर आँखें झुका लेते हैं,
क्यों मिलायें उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से ही अपना बना लेते हैं।
हम घबराकर आँखें झुका लेते हैं,
क्यों मिलायें उन आँखों से आँखें,
सुना है वो आँखों से ही अपना बना लेते हैं।
मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं
मोहब्बत मुक़द्दर है एक ख्वाब नहीं,
ये वो रिश्ता है जिस में सब कामयाब नहीं,
जिन्हें साथ मिला उन्हें उँगलियों पर गिन लो,
जिन्हें मिली जुदाई उनका कोई हिसाब नहीं।
ये वो रिश्ता है जिस में सब कामयाब नहीं,
जिन्हें साथ मिला उन्हें उँगलियों पर गिन लो,
जिन्हें मिली जुदाई उनका कोई हिसाब नहीं।
मेरी चाहत में कोई खोट तो नहीं
मेरी चाहत में कोई खोट तो नहीं शामिल,
फिर क्यों वो बार-बार आज़माए मुझे,
दिल उसकी याद से एक पल भी नहीं जुदा,
फिर कैसे मुमकिन है वो भूल जाए मुझे।
फिर क्यों वो बार-बार आज़माए मुझे,
दिल उसकी याद से एक पल भी नहीं जुदा,
फिर कैसे मुमकिन है वो भूल जाए मुझे।
वो तो साँसों में बसी है मेरे
| हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर, हम उसे अपनी खता कहते हैं, वो तो साँसों में बसी है मेरे; जाने क्यों लोग उसे मुझे जुदा कहते हैं। |
उसने कुछ माँगा भी तो मांगी जुदाई
उसको चाहा पर इज़हार करना नहीं आया,
कट गयी उम्र पर हमें प्यार करना नहीं आया,
उसने कुछ माँगा भी तो मांगी जुदाई,
और हमें भी इंकार करना नहीं आया।
कट गयी उम्र पर हमें प्यार करना नहीं आया,
उसने कुछ माँगा भी तो मांगी जुदाई,
और हमें भी इंकार करना नहीं आया।
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