आँखों में देख कर वो दिल की हकीकत जानने लगे, उनसे कोई रिश्ता भी नहीं फिर भी अपना मानने लगे, बन कर हमदर्द कुछ ऐसे उन्होंने हाथ थामा मेरा, कि हम खुदा से दर्द की दुआ मांगने लगे।
उनके लबो पर देखो फिर आज मेरा नाम आया है, लेकर नाम मेरा देखो महबूब आज कितना शरमाया है, पूछे मेरी ये आँखे उनसे कि कितनी मोहब्बत है मुझसे, बोले वो पलके झुका कि मेरी हर साँस में बस तू ही समाया है।