हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे,
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे,
ये दिल भी कितना अजीब है कि,
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे।
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे,
ये दिल भी कितना अजीब है कि,
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे।
| आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप मिल जाते हैं, कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को, याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं। |
| आज हम हैं कल हमारी यादें होंगी, जब हम ना होंगे तब हमारी बातें होंगी, कभी पलटोगे ज़िन्दगी के यह पन्ने, तब शायद आपकी आँखों से भी बरसातें होंगी। |
| वो नहीं आती पर निशानी भेज देती है, ख्वाबों में दास्ताँ पुरानी भेज देती है, कितने मीठे हैं उसकी यादों के मंज़र, कभी-कभी आँखों में पानी भेज देती है। |