ये दिल भी कितना अजीब है..

हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे,
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे,
ये दिल भी कितना अजीब है कि,
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे।

कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को

आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की,
लम्हें तो अपने आप मिल जाते हैं,
कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को,
याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं।

आज हम हैं कल हमारी यादें होंगी

आज हम हैं कल हमारी यादें होंगी,
जब हम ना होंगे तब हमारी बातें होंगी,
कभी पलटोगे ज़िन्दगी के यह पन्ने,
तब शायद आपकी आँखों से भी बरसातें होंगी।

कितने मीठे हैं उसकी यादों के मंज़र

वो नहीं आती पर निशानी भेज देती है,
ख्वाबों में दास्ताँ पुरानी भेज देती है,
कितने मीठे हैं उसकी यादों के मंज़र,
कभी-कभी आँखों में पानी भेज देती है।

दिल का दर्द ताजा हुआ,

हर मुलाकात पर वक्त का तकाज़ा हुआ,
हर याद पे दिल का दर्द ताजा हुआ,
सुनी थी सिर्फ हमने गज़लों मे जुदाई की बातें,
अब खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ!

दिल तोड़कर रोए

वो रोए तो बहुत.. पर मुहं मोड़कर रोए,
कोई तो मजबूरी होगी.. जो दिल तोड़कर रोए,
मेरे सामने कर दिए मेरी तस्वीर के टुकडे़,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए.

तेरे दिल में हूँ पर तेरे पास नहीं

उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं,
तेरे दिल में हूँ पर तेरे पास नहीं,
झूठ कहूँ तो सब कुछ है मेरे पास,
और सच कहूँ तो तेरे सिवा कुछ नहीं।