तुम में घुल जाए कोई चाँद का टुकड़ा..

रोज़ आ जाते हो तुम नींद की मुंडेरों पर,
बादलों में छुपे एक ख़्वाब का मुखड़ा बन कर,
खुद को फैलाओ कभी आसमाँ की बाँहों सा,
तुम में घुल जाए कोई चाँद का टुकड़ा बन कर।

याद उनकी आई और रुलाती चली गयी

तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी,
किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी,
महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा प्यार को,
बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी।

किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये

समंदर के सफर में इस तरह आवाज़ दो हमको,
हवाएं तेज़ हो जायें और कश्तियों में शाम हो जाये,
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
ना जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये।

ये दिल भी कितना अजीब है..

हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे,
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे,
ये दिल भी कितना अजीब है कि,
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे।

कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को

आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की,
लम्हें तो अपने आप मिल जाते हैं,
कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को,
याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं।

आज हम हैं कल हमारी यादें होंगी

आज हम हैं कल हमारी यादें होंगी,
जब हम ना होंगे तब हमारी बातें होंगी,
कभी पलटोगे ज़िन्दगी के यह पन्ने,
तब शायद आपकी आँखों से भी बरसातें होंगी।

कितने मीठे हैं उसकी यादों के मंज़र

वो नहीं आती पर निशानी भेज देती है,
ख्वाबों में दास्ताँ पुरानी भेज देती है,
कितने मीठे हैं उसकी यादों के मंज़र,
कभी-कभी आँखों में पानी भेज देती है।