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हर याद पर दिल का दर्द ताज़ा हुआ
हर मुलाक़ात पर वक़्त का तकाज़ा हुआ,
हर याद पर दिल का दर्द ताज़ा हुआ,
सुनी थी सिर्फ ग़ज़लों में जुदाई की बातें,
जब खुद पर बीती तो हक़ीक़त का अंदाज़ा हुआ..
टूटे हुए दिल का मुरब्बा बना गई
टूटे हुए दिल का मुरब्बा बना गई
घर को मेरे कचरे का डब्बा बना गई,
निकाह के 3 महीने भी ना गुजरे थे,
ना जाने किस हिसाब से वो मुझे अब्बा बना गई
क्यों प्यार करके भूल जाते है लोग
क्यों प्यार करके भूल जाते है लोग,
बिच मेहफिल में अक्सर छोड़ जाते है लोग.
न निभाना था साथ जब उम्र भर का.
क्यों दगा देके दुसरो को बेवफा कह जाते है लोग.
कभी थी मिलने की तमन्ना आपसे
आज न जाने क्यों आँखों में आँसू आ गया?
लिखते लिखते वो ख़्वाब याद आ गया?
कभी थी मिलने की तमन्ना आपसे...
न जाने क्यू ,आंसुओ में आपकी तस्वीर बन गयी.
हम तो मोहताज है आपकी एक दीदार के लिए
सौ बेवफ़ाई कबूल है एक वफ़ा के लिए,
सौ ऑंसू कबूल है एक हंसी के लिए,
हम तो मोहताज है आपकी एक दीदार के लिए,
सौ दुशमन कबूल है आपके प्यार के लिए !!
हम तोह दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं
गुनाह करके सजा से डरते है
ज़हर पी के दवा से डरते है
दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं
हम तोह दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं,
एक दोस्त न मिला गम भुलाने के लिए
काफी है सपने दिल को बहलाने के लिए,
मोहब्बत करलो दिल को दुखाने के लिए,
चाहे भले रखना पड़े गम से वास्ता
एक दोस्त न मिला गम भुलाने के लिए !
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