Sad Shayari


फिर कहीं दूर से एक बार सदा दो मुझको
मेरी तन्हाई का एहसास दिला दो मुझको
तुम तो चाँद हो तुम्हें मेरी जरूरत क्या हैं
मैं दिया हूँ किसी चौखट पर जला दो मुझको