मैं अबरार खान आपका स्वागत करता हूं अपने इस ब्लॉग पर, आपको यहां बहुत ही खूबसूरत शायरियों का कलेक्शन मिलेगा। मैं आशा करता हूं आपको ये शायरियां पसंद आयेगी। अगर आपको मेरी शायरियां अच्छी लगती है तो कमेन्ट करके जरूर बताए धन्यवाद।
1. जरा सा क्या चाहा उसने मुझे,
मैंने खुद को पूरा दे दिया उसे।
2. सब मशरूफ हैं किसी ना किसी काम में,
हम आज भी खाली बैठे हैं आपके इंतजार में।
3. सुन पगली वो तो बस दिल की ख्वाहिश थी तू,
वरना मेरे शौक तो आज भी तेरी औकात से बड़े हैं।
4. जरा सा बात करने का तरीका सीख लो तुम भी,
उधर तुम बात करते हो इधर दिल टूट जाता है।
5. लबों से चाहत की खुशबू चुराने दो,
बहुत हो गया सितम अब तो पास आने दो।
6. ना करना जुबां से इजहार मुहब्बत का,
बस इशारों से ही दिल की बात बताने दो।
7. खुली जो आंख तो न वो था और ना वो जमाना था,
बस दहकती आग थी तन्हाई और फसाना था।
8. क्या हुआ जो चंद ही कदमों पर थक के बैठ गयें,
तुम्हें तो साथ मेरा दूर तक निभाना था।
9. जिनका मिलना मुकद्दर में लिखा नहीं होता,
उनसे मोहब्बत कसम से कमाल होती है।
जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना,
बहुत तड़पाते हैं अक्सर सीने से लगाने वाले।
1. जरा सा क्या चाहा उसने मुझे,
मैंने खुद को पूरा दे दिया उसे।
2. सब मशरूफ हैं किसी ना किसी काम में,
हम आज भी खाली बैठे हैं आपके इंतजार में।
3. सुन पगली वो तो बस दिल की ख्वाहिश थी तू,
वरना मेरे शौक तो आज भी तेरी औकात से बड़े हैं।
4. जरा सा बात करने का तरीका सीख लो तुम भी,
उधर तुम बात करते हो इधर दिल टूट जाता है।
5. लबों से चाहत की खुशबू चुराने दो,
बहुत हो गया सितम अब तो पास आने दो।
6. ना करना जुबां से इजहार मुहब्बत का,
बस इशारों से ही दिल की बात बताने दो।
7. खुली जो आंख तो न वो था और ना वो जमाना था,
बस दहकती आग थी तन्हाई और फसाना था।
8. क्या हुआ जो चंद ही कदमों पर थक के बैठ गयें,
तुम्हें तो साथ मेरा दूर तक निभाना था।
9. जिनका मिलना मुकद्दर में लिखा नहीं होता,
उनसे मोहब्बत कसम से कमाल होती है।
जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना,
बहुत तड़पाते हैं अक्सर सीने से लगाने वाले।




